दुनिया के सबसे बड़े अमीरों में शुमार जेफ बेजोस ने यदि दुनिया में चमत्कारिक सफलताएं हासिल की हैं तो उसके मूल में उनकी दूरदृष्टि, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल तथा पक्का इरादा शामिल है। अरबपति अमेरिकी कारोबारी और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस ने बीते मंगलवार अपनी निजी कंपनी ब्लू ओरिजन के तत्वावधान में अंतरिक्ष की उड़ान भरी, जिसमें उनका भाई, एक 82 वर्षीय पूर्व पायलट वैली फंक और एक 18 साल का छात्र शामिल था। जो कालांतर दस मिनट व दस सेकेंड के बाद पैराशूट के जरिये वापस धरती पर आ गये। इस घटना को स्पेस टूरिज्म की शुरुआत माना जा रहा है। हालांकि कुछ दिन पहले ही ब्रिटिश अरबपति कारोबारी रिचर्ड ब्रैनसन वर्जिन गैलेक्टिक रॉकेट प्लेन के जरिये अंतरिक्ष के छोर तक पहुंचने में कामयाब हुए थे, जिसमें एक भारतीय मूल की बेटी सिरीशा बांदला भी शामिल थी। लेकिन बेजोस ने उस यात्रा से 16 किलोमीटर अधिक ऊंचाई तक उड़ान भरी और चार मिनट की भारहीनता में रहते हुए वापस धरती पर लौटे। बेजोस ने आज से डेढ़ दशक पहले स्पेस टूरिज्म का सपना देखा था और वर्ष 2004 में ब्लू ओरिजिन नाम की एरोस्पेस फर्म की स्थापना की थी, जिसका लक्ष्य महंगे टिकट पर लोगों को अंतरिक्ष की सैर कराना था। आज वो सपना हकीकत बन गया है।
दरअसल, बेजोस ने उड़ान के लिये उस दिन को चुना जब अमेरिका अपोलो यान के चांद पर उतरने की 52वीं वर्षगांठ मना रहा था। उन्होंने अमेरिका के पहले अंतरिक्ष यात्री एलन बी. शेपर्ड के नाम पर अपने यान का नाम न्यू शेफर्ड रखा। इस यान की उड़ान टेक्सस से बेजोस की निजी लान्च साइट वैन हॉर्न से रॉकेट के जरिये हुई। अंतरिक्ष में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये न्यू शेफर्ड को बड़ी-बड़ी खिड़कियों के साथ इस तरह बनाया गया है कि लोग अंतरिक्ष व अंतरिक्ष से धरती का नजारा देख सकें।
सदा सुर्खियों में बने रहने वाले बेजोस की जिंदगी हमेशा ऐसी चमक-दमक भरी नहीं थी। उनके सपने बड़े थे और दिमाग उर्वरा। कभी एक गैराज से पुरानी किताबें बेचने वाले बेजोस यदि आज खरबों में खेल रहे हैं तो उसमें उनकी मेहनत और हवाओं के बहाव को सूंघने की क्षमता शामिल है। इंटरनेट के विस्तार के बाद ऑनलाइन में कितना बड़ा कारोबार हो सकता है, ये बेजोस ने दशकों पहले महसूस कर लिया था। कल्पना कि कैसे एक फोन पर बटन दबाकर घर बैठे खरीदारी की जा सकती है। बेजोस की कल्पना सार्थक होने की वजह से आज दुनिया के मॉल फीके पड़े हैं और परंपरागत दुकानें अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही हैं। इसी सोच के चलते आज अमेजन की बादशाहत पूरी दुनिया में कायम है।
लेकिन बेजोस की जिंदगी की शुरुआत इतनी सुखद नहीं थी। उनका जन्म अमेरिका के न्यू मैक्सिको के अल्बुकर्क में बारह जनवरी 1964 में हुआ था। जब उनके पिता टेड जॉरगन्सन का विवाह उनकी मां जैकी से हुआ तो मां की उम्र महज सत्रह साल थी। यह रिश्ता महज एक साल ही चल पाया। तलाक के बाद उनकी मां ने माइक बेजोस के साथ विवाह कर लिया। जेफ पिता माइक बेजोस व मां के साथ ही टेक्सस व फ्लोरिडा में पले-बढ़े। बचपन से ही जेफ का रुझान विज्ञान और इंजीनियरिंग गतिविधियों की तरफ था। अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान एक वाद-विवाद प्रतियोगिता में उन्होंने अंतरिक्ष में कॉलोनी बसाने की कल्पना पर प्रकाश डाला था। कालांतर वर्ष 1986 में उन्होंने इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग बैचलर-इन-साइंस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने वित्तीय कंपनियों में भी कुछ दिन काम किया। लेकिन तीस साल आते-आते उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और जोखिम के रास्ते पर बढऩे का फैसला किया। उनकी कल्पनाएं व महत्वाकांक्षाएं सदैव उन्हें विज्ञान की ओर उन्मुख करती थी। जो बाद में नये व्यावसायिक उद्यम अमेजन की शुरुआत करने में सहायक बनी।
कालांतर उन्होंने कुछ पैसे जुटाये, कुछ परिवार की मदद ली और अपनी ई-कॉमर्स कंपनी में एक लाख डॉलर का निवेश किया। दरअसल, इस कंपनी की शुरुआत एक गैराज में पुरानी किताबें बेचने से हुई। बाद में इनकी कंपनी को चमत्कारिक सफलता मिली। उनका आइडिया इतने शानदार ढंग से हकीकत में बदला कि वर्ष 1995 में अमेजन को लॉन्च करने के बाद एक महीने में कंपनी को अमेरिका के पचास राज्यों तथा पैंतालिस देशों से ऑर्डर मिलने लगे। पांच साल होते-होते इसके ग्राहकों की संख्या एक करोड़ पार कर गई। जिसने उन्हें पैंतीस साल की उम्र में दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनाया। आज उन्हें दुनिया में ‘साइबर कॉमर्स का राजा’ कहा जाता है। जहां उपन्यासकार मैकेंजी से उनका विवाह चर्चा में आया था वहीं लंबे वैवाहिक जीवन के बाद उनका तलाक भी सुर्खियों में रहा, जिसके लिये उन्होंने एक बड़ी रकम चुकाई थी।
बेजोस ने साइबर कॉमर्स की दुनिया में बड़े प्रयोग किये। वे जोखिम के साथ निवेश करने से कभी नहीं चूके। उनकी नीतियां बाजार में आक्रामकता के लिये जानी जाती हैं। दाम घटाने, उपहार और मुफ्त डिलीवरी जैसे उपायों से उनकी कंपनी दुनिया के बाजार में छा जाती है। उन्हें किंडल ई-रीडर्स जैसा डिवाइस विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। वहीं उन पर बाजार पर वर्चस्व के लिये सभी तरह के हथकंडे अपनाने तथा टैक्स न भरने व श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप भी लगते रहे हैं।
अरुण नैथानी
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