लाल किले पर नारी शक्ति का जलवा

देश की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं. पूरे देश की निगाहें इस ऐतिहासिक पल पर टिकी होती हैं. 21 तोपों की गड़गड़ाहट और राष्ट्रगान की गूंज के बीच तिरंगा आसमान में लहराता है तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. इस बार उस ऐतिहासिक फ्रेम में पीएम नरेंद्र मोदी के ठीक पीछे बेहद अनुशासित और दृढ़ मुद्रा में खड़ी भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने सभी का ध्यान खींच लिया.
ध्वजारोहण की आधिकारिक और औपचारिक प्रक्रिया में प्रधानमंत्री की सहायता करती कैप्टन सोनिया की यह तस्वीर सिर्फ एक प्रशासनिक ड्यूटी नहीं थी. यह देश की ‘नारी शक्ति’ की उस बुलंद उड़ान की मिसाल थी, जो आज सीमा की रक्षा से लेकर देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय मंच तक अपनी मजबूत पहचान बना रही है.
कैप्टन सोनिया सिंह चौहान भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त सैन्य अधिकारी हैं. वे भारतीय सेना की उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अपनी योग्यता, अनुशासन और काबिलियत के दम पर हर मोर्चे पर आगे खड़ी हैं. स्वतंत्रता दिवस समारोह में जब देश और दुनिया की नजरें लाल किले पर थीं, तब कैप्टन सोनिया ने रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के संयुक्त कोऑर्डिनेशन के तहत अपनी इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को बेहद बारीकी और अनुशासन के साथ निभाया.
लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराना कोई आम प्रक्रिया नहीं है. इसके पीछे भारतीय सशस्त्र बलों का बेहद सख्त और तय सैन्य प्रोटोकॉल होता है
जीरो एरर टाइमिंग: झंडा फहराने से लेकर राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी के 1-1 सेकंड का तालमेल पहले से तय होता है.
कोऑर्डिनेटिंग सर्विस: हर साल तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना, वायुसेना) में से किसी एक को इस समारोह के कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी मिलती है.
ध्वजारोहण में सहायता: रक्षा मंत्रालय की तरफ से चुने गए अधिकारी को ही प्रधानमंत्री के साथ मंच पर खड़े होकर ध्वज की रस्सियों, सलामी और औपचारिक प्रक्रिया को संभालने का सम्मान मिलता है. इसके लिए हफ्तों पहले से रिहर्सल किया जाता है.
देश की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल
लाल किले पर कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की मौजूदगी ने देश की लाखों युवा लड़कियों के मन में देशभक्ति की नई अलख जगाई है. आज की भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका सिर्फ कागजी कामकाज या ऑफिस तक सीमित नहीं रही. चाहे सियाचिन जैसे कठिन बर्फीले इलाके में तैनाती हो, फाइटर जेट उड़ाना हो या देश के सबसे बड़े पर्व पर तिरंगे की शान संभालना हो- महिलाएं हर जगह नेतृत्व कर रही हैं. कैप्टन सोनिया की यह झलक हर बेटी को भरोसा देती है कि अगर सपने बड़े हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है.

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