ऐतिहासिक क्षण: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से गूंजा ‘वंदे मातरम’

देश की 150 साल की विरासत का मना भव्य जश्न

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 का समारोह इस बार इतिहास में दर्ज हो गया। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वजारोहण के पश्चात ‘वंदे मातरम’ की धुन गूंजी।
आज तक 1947 से चली आ रही परंपरा में प्रधानमंत्री तिरंगा फहराकर राष्ट्र को संबोधित करते थे। पर इस बार समारोह में एक नई कड़ी जुड़ी।
राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। किले की प्राचीर पर फूलों की सजावट में बीच में राष्ट्रीय ध्वज और उसके दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभक्ति के जोश और कड़ी सुरक्षा के बीच लाल किले पर 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। सेना के बैंड ने वंदे मातरम की धुन बजाई। इस दौरान मौजूद मेहमानों ने राष्ट्रीय गीत गाया।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान गाया गया। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई। इसके बाद, भारतीय वायु सेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने कार्यक्रम स्थल पर फूलों की बारिश की। एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ रहा था और दूसरे पर ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ ध्वज था।ध्वजारोहण के बाद स्कूली बच्चों के समूह और सेना के बैंड ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया।
वंदे मातरम का इतिहास
1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक प्रेरणादायक नारा बन गया था। 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। सरकार ने पिछले साल नवंबर में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले समारोह की शुरुआत की थी।
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इसकी रचना सात नवंबर 1875 को हुई और पहली बार इसे साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित किया गया। बाद में बंकिम चंद्र ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि वंदे मातरम पहली बार 1882 में लिखा गया था। 1875 में इसकी रचना और शुरुआती प्रकाशन हुआ, जबकि 1882 में यह आनंद मठ का हिस्सा बना।

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