सात सौ से अधिक नागरिकों ने प्रधानमन्त्री के राष्ट्र के नाम संबोधन को आचार संहिता का बताया उल्लंघन , चुनाव आयोग से की शिकायत
चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप
नई दिल्ली: सात सौ से अधिक पूर्व नौकरशाह, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने चुनाव आयोग को एक शिकायत पर हस्ताक्षर कर यह आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को दिए गए अपने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के माध्यम से आचार संहिता का उल्लंघन किया.उन्होंने कहा कि भाषण दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी पैसे से चलने वाले मंचों पर प्रसारित किया गया, जो सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके एकतरफ़ा चुनावी प्रचार करने जैसा है.
यह संबोधन एक सार्वजनिक भाषण था, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों को निशाना बनाया. यह भाषण तब दिया गया जब उनकी सरकार की महिलाओं को आरक्षण देने की कोशिशें – जिसके लिए लोकसभा का विस्तार करने और परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने की योजना निचले सदन में नाकाम हो गईं.उन्होंने कहा कि यह भाषण दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी पैसे से चलने वाले मंचों पर प्रसारित किया गया था, जो सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके एकतरफ़ा चुनावी प्रचार करने जैसा है
आचर संहिता के नियमों का हवाला देते हुए हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि इससे सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ मिला और निष्पक्ष चुनावी माहौल को नुकसान पहुंचा.
शिकायत में कहा गया है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा सरकारी मशीनरी और जनसंचार माध्यमों का इस्तेमाल चुनावी प्रचार और एकतरफ़ा दुष्प्रचार करना आचार संहिता का एक गंभीर उल्लंघन है.
विपक्षी दलों – कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – ने भी आचार संहिता उल्लंघन का मुद्दा उठाया है.
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में जांच, उचित कार्रवाई, भाषण को हटाने की संभावना और अगर पहले से मंज़ूरी दी गई थी, तो दूसरे दलों को भी मीडिया में बराबर समय देने की मांग की है.
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