जल्द ही संसद के डेढ़ सौ साल केइतिहास की जानकारी महज एक क्लिक के जरिए हासिल हो जाएगी। कुछ महीने बाद संसद की डिजिटल लाइब्रेरी की वेबसाइट में हमें साल 1854 से अब तक संसद में हुए वाद विवाद की एक-एक जानकारी मुहैया कराएगी। इस वेबसाइट में वाद विवाद से संबंधित चार लाख दस्तावेज और चालीस लाख पृष्ठï को डाले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि संसद में ब्रिटिश काल से अब तक जितने भी वाद विवाद हुए हैं, उसे आम नागरिकों को सहज रूप से उपलब्ध कराने की कोशिश हो रही है। हमारे पास 1854 से ले कर अब तक के कई दस्तावेज उपलब्ध हैं। अब तक दसवीं से 17वीं लोकसभा में हुए वाद विवाद को डिजिटल कर दिया गया है। इस साल तक 167 साल के दौरान हुए वाद विवाद को डिजिटल स्वरूप में वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया जाएग। उद्येश्य बस इतना है कि देशवासी संसद के विभिन्न आयामों से सहज रूप से परिचित हो सकें।
एक देश एक पोर्टल
लोकसभा के पोर्टल पर देश के विभिन्न विधानसभाओं की भी जानकारी उपलब्ध रहेगी। स्पीकर के मुताबिक देहरादून में पीठासीन अधिकारियों की बैठक में इस संबंध में कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। अब स्वतंत्रता दिवस के बाद पीठासीन अधिकारियों की एक और बैठक होगी। इसमें कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जाएगा।
संसद का एप भी
स्पीकर ने संसद को पूरी तरह से तकनीकी से जोडऩे की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसी सत्र के दौरान संसद एप पेश होगा। इसमें संसद टीवी का सीधा प्रसारण, सवाल-जवाब, वाद विवाद सहित कई अन्य अहम जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। स्पीकर ने कहा कि विशेष प्रयास के कारण अब सांसद ई नोटिस के जरिए अपने प्रश्न भेज रहे हैं। इस सत्र में कोशिश इसे सौ फीसदी तक ले जाने की है। सांसदों को पुस्तकालय के रिचर्स विभाग के जरिए ऑनलाइन किसी विषय से संबंधित डाटा चौबीस घंटे उपलब्ध है। पुस्कालय को ऑनलाइन कर दिया गया है। सांसद ऑनलाइन ही जरूरी पुस्तकें अपने घरों पर मंगा सकते हैं।
19 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के सुचारू संचालन के लिए स्पीकर 18 जून को सभी दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ चर्चा करेंगे। स्पीकर ने बताया कि सत्र में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन होगा।
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