विधिविधान और वैदिक मन्त्रोंचार के साथ आज खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट: चारधाम यात्रा का हुआ शुभारंभ

25 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया मंदिर

देहरादून : भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट पुनर्वसु नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग में विधिविधान और वैदिक मन्त्रोंचार के साथ गुरुवार को प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धांलुओं के दर्शनार्थ हेतु खोल दिए गए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं भगवान बद्री विशाल और अखंड ज्योति के दर्शन किये।कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक अवसर पर माणा एवं बामणी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक जागरों के साथ मंदिर प्रांगण में झुमैलो नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे संपूर्ण वातावरण लोक संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी भजन-कीर्तन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
कपाटोद्घाटन से पूर्व श्री बद्रीनाथ मंदिर को रंग-बिरंगे पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया था। प्रातः काल मुख्य पुजारी रावल जी, धर्माधिकारी एवं वेदपाठियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को गर्भगृह से निकालकर लक्ष्मी मंदिर में विराजमान कराया गया तथा भगवान कुबेर एवं उद्धव जी को गर्भगृह में स्थापित किया गया। तत्पश्चात भगवान बद्री विशाल की चतुर्भुज मूर्ति का विधिवत अभिषेक एवं श्रृंगार किया गया।श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि पूरे यात्रा मार्ग पर पुलिस-प्रशासन की ओर से चाक-चौबंद प्रबंध किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए मंदिर को 25 क्विंटल गेंदा के फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है।
अब बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 पूरी तरीके से सुचारू हो गई है। सबसे पहले 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए थे। फिर 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट भी खोले गए। इसके साथ ही अब आस्था, भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है।

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