भारतीय फोटोजर्नलिज्म का आकाश हुआ सूना : रघु राय के निधन से देश ने खोया महान दृश्य कथाकार

तस्वीरों से लिखा देश का इतिहास

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नई दिल्ली : देश के प्रसिद्ध फोटोजर्नलिस्ट रघु राय का रविवार तड़के दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें ‘भारतीय फोटोजर्नलिज्म का पितामह’ कहा जाता था।
छह दशक का सफर
रघु राय ने 60 साल से ज्यादा समय तक अपने कैमरे से भारत की खुशियों, त्रासदियों और विरोधाभासों को कैद किया। 1942 में झंग, अब पाकिस्तान में जन्मे रघु राय ने 1960 के दशक में ‘द स्टेट्समैन’ से करियर शुरू किया। 1971 में हेनरी कार्टियर-ब्रेसन के नामांकन पर वह मैग्नम फोटोज से जुड़ने वाले पहले भारतीय बने।
इतिहास बनाने वाली तस्वीरें
1. भोपाल गैस त्रासदी – एक बच्चे की आधी खुली आंखों वाली तस्वीर ने दुनिया का ध्यान खींचा।
2. बांग्लादेश मुक्ति युद्ध 1971 – शरणार्थियों पर काम के लिए 1972 में पद्म श्री मिला।
3. इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, दलाई लामा – इनके पोर्ट्रेट आधुनिक भारत के दस्तावेज बन गए।
4. ऑपरेशन ब्लू स्टार – जरनैल सिंह भिंडरावाले की आखिरी तस्वीरें भी उन्होंने ही खींची थीं।
बीमारी से जंग
बेटे नितिन राय ने बताया कि पिता को 2 साल पहले प्रोस्टेट कैंसर हुआ था। इलाज के बाद कैंसर पेट और फिर दिमाग तक फैल गया। उम्र संबंधी दिक्कतों के चलते रविवार सुबह उनका निधन हुआ।
अंतिम विदाई
रघु राय का अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे लोधी श्मशान घाट पर हुआ । वे पत्नी गुरमीत, बेटे नितिन और बेटियों लगन, अवनी व पूर्वई को छोड़ गए हैं।
श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत वरिष्ठ पत्रकारों ने शोक जताया।
विरासत
18 से ज्यादा किताबें, टाइम, लाइफ, न्यूयॉर्क टाइम्स और नेशनल ज्योग्राफिक में छपी । 1992 में अमेरिका में ‘फोटोग्राफर ऑफ द ईयर’ और 2009 में फ्रांस का ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स’ सम्मान मिला।

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