केंद्र सरकार ने रूस से कच्चे तेल के आयात से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने से किया इनकार

आरटीआई आवेदन के जरिए भारत द्वारा रूस से आयात किए गए कच्चे तेल की मात्रा, कीमत और छूट से जुड़ी मांगी गई थी जानकारी

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नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने रूस से कच्चे तेल के आयात से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। सरकार के इस फैसले को केंद्रीय सूचना आयोग ने भी सही माना है
एक आरटीआई आवेदन के जरिए रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा रूस से आयात किए गए कच्चे तेल की मात्रा, कीमत और छूट से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी देने से मना कर दिया। मंत्रालय का तर्क है कि ये आंकड़े “संवेदनशील वाणिज्यिक हित” और “देश की ऊर्जा सुरक्षा” से जुड़े हैं। आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a) के तहत ऐसी जानकारी देने से राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकता है।
केंद्रीय सूचना आयोग का रुख
आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की थी। सुनवाई के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने फैसला सुनाया कि सरकार का रुख सही है। आयोग ने कहा कि तेल आयात की डील देशों के बीच द्विपक्षीय समझौतों का हिस्सा हैं। इनका खुलासा करने से भारत की सौदेबाजी की क्षमता और कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। इसलिए यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
सरकार पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे सस्ते स्रोत से तेल खरीदेगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचा था। इससे भारत का आयात बिल कम करने में मदद मिली। सरकार का मानना है कि इन सौदों का ब्यौरा देने से भविष्य में मिलने वाली छूट प्रभावित हो सकती है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार पारदर्शिता से बच रही है। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का हक है कि कितनी छूट पर तेल खरीदा गया और उसका फायदा आम आदमी तक पहुंचा या नहीं।
2022 में युद्ध शुरू होने के बाद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था। 2023-24 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35% से ज्यादा रही।
केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले के बाद अब सरकार रूस से तेल आयात का देश-वार ब्यौरा देने के लिए बाध्य नहीं है। वाणिज्य मंत्रालय हर महीने कुल आयात के आंकड़े तो जारी करता है, लेकिन यह नहीं बताता कि किस देश से कितना तेल आया।

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