कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: नेपाल ने लिपुलेख पर ठोका दावा, भारत के साथ रिश्तों में आई खटास

भारत-चीन का साझा रूट, : लिपुलेख पर बढ़ा त्रिकोणीय तनाव

0

काठमांडू:इस साल जून से शुरू हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत और चीन के बीच हुए तालमेल से नेपाल में कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारत सरकार की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा का ऐलान किए जाने पर नेपाल ने कड़ा एतराज जताया है। एतराज की वजह इस यात्रा के उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लिपुलेख दर्रे से जाना है। नेपाल ने भारत के साथ-साथ चीन के सामने भी विरोध दर्ज कराया है क्योंकि यह यात्रा बीजिंग के सहयोग से हो रही है। यह यात्रा इस साल जून से अगस्त के बीच होगी।
विदेश मंत्रालय ने ऐलान किया है कि 2026 की यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला दर्रे से कराई जाएगी। चीन सरकार के सहयोग से जून से अगस्त तक यात्रा होगी। नेपाल ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के भारत-चीन के फैसले पर आपत्ति जताई है। नेपाल सरकार ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना हिस्सा बताया है नेपाल ने लिपुलेख क्षेत्र में सड़क निर्माण और तीर्थाटन (मानसरोवर यात्रा) जैसी एकतरफा गतिविधियों पर आपत्ति जताई है। नेपाल की बालेन शाह सरकार ने अपनी पिछली सरकार की तरह ही इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है और नए नक्शे में इन क्षेत्रों को शामिल किया था।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि
नेपाल सरकार इस बात पर पूरी तरह से साफ और पक्की है कि महाकाली नदी के पूरब में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी 1816 की सुगौली संधि के बाद से नेपाल का हिस्सा हैं।
इससे पहले भी नेपाल सरकार लगातार भारत से इस इलाके में सड़क बनाने, बॉर्डर पर व्यापार और तीर्थयात्रा जैसी कोई भी एक्टिविटी ना करने की अपील करती रही है।
इसके अलावा यह साफ किया जाता है कि हमने भारत के साथ-साथ दोस्त देश चीन को भी इस बात की जानकारी दी है कि लिपुलेख नेपाल का इलाका है।
भारत और नेपाल के बीच इस विवाद की जड़ में 1816 की गई सुगौली संधि है। सुगौली संधि में काली नदी को दोनों देशों के बीच सीमा के तौर पर माना गया था। नेपाल का दावा है कि नदी लिम्पियाधुरा से निकलती है, जो लिपुलेख दर्रे के उत्तर-पश्चिम में है। इसलिए कालापानी और लिपुलेख नेपाल का है।
नेपाल कहता है कि भारत की इस क्षेत्र में गतिविधि उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है। दूसरी ओर भारत ने नेपाल के इस दावे को खारिज किया है कि नदी का स्रोत कालापानी गांव के पास के झरने हैं। भारत ने कई मौकों पर यह साफ-साफ कहा है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है और लगातार बना रहेगा।
उधर भारत इस दावे को खारिज करता रहा है। भारत का मानना है कि लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है और यह भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिसे चीन के साथ व्यापार और तीर्थाटन के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.