————–
चलो दहन हो गया रावण का, निभाई गई परम्परा,
हर वर्ष की भांति उल्लास से मनाया गया दशहरा।
जलती हुई रावण ने जलाने वालों से पूछा….
क्या सच मुच कलयुगी दशानन को राम ने मारा ?
मुझे जलाने वालों क्या तुम में राम के आदर्श है ?
श्री राम बनके जलाओगे तो ही मेरा अंत होना है।
भ्रष्टाचार आतंकवाद बेईमानी अनैतिकता….
तुम्हारे अंदर ये सब गुण क्या रावण से कम हैं।
जिस भारत में नारी को सब दुर्गा का रूप बताते हैं,
देख रहे नित दिन नारी की इज्ज़त को लूटे जाते हैं।
रावण दहन के पहले सीता की रक्षा करना है…
आप सबको अपने अंदर के रावण को तो मारना है।
सच्चाई की सदा जीत हो बचपन से हमें बताया है,
अभिमानी रावण का पुतला हरदम याद दिलाया है।
आओ इस दशहरे में हम सब लें शपथ….
प्रभुराम के आदर्शों पर चलकर रामराज्य बनाना है।
✍🏼..लोकेश सतपथी
घुटकूपाली, पुसौर.
Comments are closed.