-: तुम जो आओ तो जिन्दगी में ताजगी भर लें |
दो घड़ी दिल में मुलाक़ात की खुशी भर लें || :-
-:( जसगीत):-
तुम जो आओ तो जिन्दगी में ताजगी भरलें |
दो घड़ी दिल में मुलाक़ात की खुशी भरलें ||
डंस रही है हमें नागिन सी शब की तनहाई |
अंधेरी शब में आओ मिलके रौशनी करलें ||
धड़क-धड़क के नाम ले रहा तुम्हारा दिल |
कि वक्ते – हिज्र को हम वस्ल से हसीं करलें ||
गमें-जुदाई सालता है दिल को शामो-सहर |
कहीं ऐसा न हो घबरा के मैकशी करलें ||
सुकून किस तरह दिल को मिले तुम्हारे बिना |
तुम अगर आओ तो खुश हाल जिन्दगी करलें ||
ले रहा इम्तिहान अपना है खुदा “बेदम” |
वो अगर हमको मिलादे तो बंदगी करलें ||
वेदमणि सिंह ठाकुर “बेदम”
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