पवन ऊर्जा उत्पादन में भारत की नई उड़ान : दुनिया के शीर्ष चार पवन ऊर्जा उत्पादक देशों में हुआ शामिल

पवन ऊर्जा के क्षेत्र में रफ्तार पकड़ रहा भारत, 50 गीगावॉट का आंकड़ा पार

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नई दिल्ली: भारत ने पवन ऊर्जा उत्पादन में नया मुकाम हासिल कर लिया है। देश की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 50 गीगावॉट को पार कर गई है। इसके साथ ही भारत दुनिया के शीर्ष चार पवन ऊर्जा उत्पादक देशों में मजबूती से शामिल हो गया है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो साल में गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में बड़े पवन ऊर्जा पार्क शुरू होने से उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। गुजरात का कच्छ क्षेत्र और तमिलनाडु का तूतीकोरिन अब देश के सबसे बड़े विंड एनर्जी हब बन गए हैं।
ऑफशोर विंड पर फोकस
सरकार अब समंदर में लगने वाले ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट पर जोर दे रही है। गुजरात के तट पर 1 गीगावॉट का पहला ऑफशोर विंड फार्म 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए यूरोपीय कंपनियों के साथ तकनीकी समझौते भी हो चुके हैं। ऑफशोर प्रोजेक्ट से जमीन की कमी की समस्या भी हल होगी और तेज हवाओं का फायदा मिलेगा।
2030 का लक्ष्य
भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य रखा है। इसमें पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी 140 गीगावॉट तय की गई है। सरकार ने विंड-सोलर हाइब्रिड पॉलिसी भी लागू की है, ताकि दिन में सोलर और रात में पवन ऊर्जा से 24 घंटे बिजली मिल सके।
रोजगार और निवेश
पवन ऊर्जा सेक्टर में पिछले एक साल में 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है। इससे टर्बाइन निर्माण, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में 75 हजार से ज्यादा नए रोजगार बने हैं। “मेक इन इंडिया” के तहत देश में ही टर्बाइन ब्लेड और टावर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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