रायपुर । बरसात के दिनों में जब नालों में पानी का बहाव बढ़ जाता है, कई इलाकों में जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है। चाहे सुख-दुख में शामिल होना हो या सामाजिक आयोजनों में शामिल होना हो, स्कूल या अस्पताल पहुंचना हो सभी प्रकार की गतिविधियां रुक जाती हैं। यही नहीं नालों में जलभराव के कारण होने वाले आवागमन में बाधा से किसानों की खेती-बाड़ी का कार्य भी प्रभावित हो जाता है। बरसात में कुछ इसी तरह की समस्याओं का सामना बस्तर जिले के बकावंड विकास खण्ड में स्थित सतोषा गांव और उसके आस-पास के लोग कर रहे थे। बरसों बाद अब जैबेल से सतोषा मार्ग में उच्चस्तरीय सेतुओं के निर्माण से क्षेत्र के ग्रामीणों को राहत मिली है।
जैबेल से सतोषा मार्ग में मार्ग में छत्तीसगढ़ ग्रामीण सडक़ विकास अभिकरण द्वारा लगभग 5 करोड़ 37 लाख रुपए की लागत से दो नए सेतुओं का निर्माण किया गया है, जिनका लोकार्पण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 21 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया है। इनमें एक सेतु का निर्माण लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपए और दूसरे सेतु का निर्माण लगभग 2 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से किया गया है। इस क्षेत्र के ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने और इसके साथ ही राताखंडीपारा मेलबेड़ा में भी 2 करोड़ 92 लाख 75 हजार रुपए की लागत से सेतु का निर्माण किया गया है।
लगभग चार हजार की आबादी का सतोषा ओडिसा और कोंडागांव जिले की सरहद पर है। बस्तर जिले के बकावंड विकास खण्ड में स्थित सतोषा 22 पारा-मोहल्ला में बंटा हुआ है। इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए अपने विकासखण्ड और जिला मुख्यालय तक आवागमन के लिए सतोषा-जैबेल पहुंच मार्ग सबसे आसान मार्ग है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत इस पक्के मार्ग का निर्माण किया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग में मारकंडी नदी के साथ ही जोबा नाला में बहुत ही कम ऊंचाई के पुलों का निर्माण किया गया था, जिन्हें स्थानीय लोग रपटा कहते हैं। किन्तु इन नालों में जलभराव के कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस क्षेत्र के ग्रामीण प्रशासनिक कार्यों के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए पूरी तरह बस्तर जिले पर निर्भर हैं, चाहे उच्च शिक्षा के लिए बकावंड एवं जगदलपुर में अध्ययनरत विद्यार्थी हों या गंभीर मरीज। बारिश में नाला भर जाने से उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कुछ वर्ष पूर्व जैबेल बाजार में सामान लेने आए ग्रामीणों ने वापसी में भारी बारिश के कारण भरे नाले को पार करने की कोशिश की, जिसमें कोंडागांव जिले के छतोड़ी गांव की एक महिला और सतोषा के चालानगुड़ा के एक युवक की मृत्यु तक हो गई थी। ग्रामीणों ने खुशी जताई कि अब इन नालों में सेतुओं के निर्माण से समस्याएं नहीं होगी और क्षेत्र के ग्रामीणों का जीवन भी अब सहज होगा।
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