गंगा एक्सप्रेसवे से धार्मिक स्थलों तक पहुंच होगी आसान, आस्था की यात्रा को मिलेगी नई गति

पीएम् मोदी 29 अप्रैल को करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे 594 किलोमीटर के गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उद्घाटन समारोह हरदोई जिले की बिलग्राम तहसील के सलेमपुर गांव में होगा और उसी दिन पूरे एक्सप्रेसवे को जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से प्रदेश के दर्जनों प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा यह एक्सप्रेसवे धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगा और आस्था की यात्रा को सुगम बनाएगा।
पांच बड़े आध्यात्मिक कॉरिडोर होंगे मजबूत
गंगा एक्सप्रेसवे से प्रदेश के पांच प्रमुख तीर्थ सर्किट मजबूत होंगे। इनमें प्रयागराज-विंध्याचल-काशी कॉरिडोर, प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोर, प्रयागराज-लखनऊ-नैमिषारण्य कॉरिडोर, प्रयागराज-राजापुर-चित्रकूट कॉरिडोर तथा प्रयागराज-मथुरा-वृंदावन-शुक तीर्थ कॉरिडोर शामिल हैं। इससे श्रद्धालु एक ही यात्रा में काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा और नैमिषारण्य जैसे तीर्थों के दर्शन कर सकेंगे।
गढ़ गंगा से लेकर संगम तक सीधी पहुंच
एक्सप्रेसवे के माध्यम से गढ़मुक्तेश्वर में गंगा स्नान, अमरोहा का वासुदेव मंदिर, संभल की कैलादेवी, बदायूं का हनुमंत धाम, बेल्हा देवी धाम और चंद्रिका देवी शक्ति पीठ तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुंचने में भी लगने वाला समय आधा रह जाएगा।
12 जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जिलों से होकर गुजरेगा। 100 से अधिक गांवों को सर्विस रोड के माध्यम से सीधा लाभ मिलेगा। मेरठ के गोविंदपुर, अटौला, खड़खड़ी समेत 20 गांवों के लोगों को विशेष फायदा होगा।
यात्रा समय में होगी भारी कमी
अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की दूरी 6 से 7 घंटे में तय की जा सकेगी, जबकि वर्तमान में इसमें 10 से 11 घंटे लगते हैं। दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने में भी केवल 6 घंटे लगेंगे।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
एक्सप्रेसवे के किनारे होटल, धर्मशाला, लोकल बाजार, ट्रांसपोर्ट सर्विस और हस्तशिल्प उद्योग तेजी से विकसित होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। धार्मिक पर्यटन की अवधि और खर्च बढ़ने से पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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