अमरावती यौन शोषण मामला: 10 हिरासत में, 41 अकाउंट डिलीट, 100 से अधिक वीडियो पर एस आई टी जांच तेज; एनसीडब्ल्यू ने लिया स्वतः संज्ञान

41 सोशल मीडिया अकाउंट हटाए गए

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मुंबई : अमरावती में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और वीडियो ब्लैकमेलिंग मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र डीजीपी को समयबद्ध जांच के आदेश दिए हैं। 100 से अधिक वीडियो मिलने से मामला गंभीर हो गया है।महाराष्ट्र के अमरावती में सामने आए एक गंभीर यौन शोषण मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मामले से जुड़े संदिग्धों पर शिकंजा कसते हुए 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वाले 41 सोशल मीडिया अकाउंट भी हटा दिए गए हैं। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले पुलिस मुख्य आरोपी अयान अहमद (19) सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसे फिलहाल पुलिस हिरासत में रखा गया है। जांच के दौरान सामने आया कि पीड़िताओं के अश्लील फोटो और वीडियो सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे थे। इसे देखते हुए पुलिस की साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 41 अकाउंट डिलीट कर दिए, जो इस आपराधिक गतिविधि में शामिल थे। पुलिस ने उन जगहों की भी जांच की है, जहां आरोपी पीड़िताओं से मिलता था। इनमें कुछ कैफे और एक किराए का फ्लैट शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर मौके का निरीक्षण (पंचनामा) किया गया है।
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब एक वीडियो में आरोपी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ जन्मदिन मनाते नजर आया। इसके बाद एक अधिकारी और दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके।इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कड़ा रुख अपनाया है और महाराष्ट्र पुलिस को समयबद्ध जांच के आदेश दिए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद वसंत दाते को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की गहन और तय समय सीमा के भीतर जांच की जाए।
एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने महाराष्ट्र पुलिस से पांच दिनों के भीतर एक्शन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी पीड़ितों की पहचान, सुरक्षा और मानसिक सहायता सुनिश्चित की जाए। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाए।
आयोग ने इस मामले को केवल यौन शोषण तक सीमित न मानते हुए एक व्यापक साइबर फॉरेंसिक जांच की आवश्यकता बताई है। एनसीडब्ल्यू ने कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस तरह दुरुपयोग बेहद चिंताजनक है और इससे नाबालिगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।

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