भारत ने लॉन्च किया स्वदेशी ‘सचेत ‘ अलर्ट सिस्टम, मोबाइल पर सायरन के साथ मिलेगी आपदा की चेतावनी
रायपुर से बस्तर तक गूंजा अलर्ट: 'सचेत' प्रणाली से छत्तीसगढ़ में भी भेजा गया आपातकालीन परीक्षण संदेश
नई दिल्ली: भारत सरकार ने देशभर में आपदा की तुरंत सूचना देने के लिए स्वदेशी ‘सचेत’ चेतावनी प्रणाली की आज शुरुआत की । केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसका शुभारंभ किया।शनिवार सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर देशभर में प्रणाली का परीक्षण किया गया।
इस प्रणाली को दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सेंन्टर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डीओटी) द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और गृह मंत्रालय (एमएचए) के सहयोग से विकसित किया गया है। यह पहल भारत की आपातकालीन संचार प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सचेत’ चेतावनी प्रणाली के शुभारंभ के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी इसका परीक्षण किया गया। शनिवार सुबह ठीक 11 बजकर 42 मिनट पर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा समेत प्रदेश के सभी जिलों में लाखों लोगों के मोबाइल पर पर अलार्म की आवाज के साथ ‘आपातकालीन चेतावनी’ का संदेश पहुंचा। संदेश में साफ लिखा था कि यह केवल परीक्षण है, घबराने की जरूरत नहीं है।
परंपरागत मैसेजिंग के विपरीत, सीबी तकनीक एक परिभाषित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ अलर्ट भेजने में सक्षम बनाती है, जिससे नेटवर्क व्यस्तता के दौरान भी लगभग तुरंत डिलीवरी सुनिश्चित होती है।
अधिकारियों ने कहा कि एसएमएस और सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के एकीकरण से भारत के आपातकालीन प्रतिक्रिया संचार ढांचे में काफी सुधार होगा, जिससे यह आपदाओं के दौरान अधिक मजबूत, वास्तविक समय और सुलभ बन जाएगा।
‘सचेत’ प्रणाली में चेतावनी संदेश एक-एक करके नहीं भेजे जाते। मोबाइल से एक तय इलाके की सभी भाषाओं पर एक साथ संदेश प्रसारित होता है। इससे चेतावनी तुरंत पहुंच जाती है। संदेश के साथ अलार्म की आवाज और चमकती सूचना आती है, जो मोबाइल के साइलेंट होने पर भी बजती है।
यह प्रणाली देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चालू हो गई है। इसके जरिए भूकंप, बाढ़, सुनामी, बिजली गिरना, गैस रिसाव जैसी आपदाओं की सूचना हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में दी जाएगी। सरकार बता चुकी है कि ‘सचेत’ के जरिए पहले ही 134 अरब से ज्यादा लघु संदेश 19 भाषाओं में भेजे जा चुके हैं।
सरकार का कहना:
यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटेगी और आपदा में हर सेकंड कीमती समय बचाया जा सकेगा। असली आपदा में “तुरंत खाली करें” या “सुरक्षित जगह जाएं” जैसे निर्देश भी भेजे जाएंगे।